कम्प्युटर का अविष्कार किसने किया और कैसे हुआ।। जाने हिन्दी में
आज के समय में कम्प्युटर और डिजिटल जीवन ही सबकुछ है। अठारवी सताब्दी से पहले के समय में ऐसा कुछ नही था। अठारवी सताब्दी के बाद डिजिटल जीवन का निर्माण होना शुरू हुआ। अठारवी सताब्दी से पहले किसी ने यह सोचा भी नही था कि आने वाला समय इतना डिजिटल हो जाएगा। और यही वजह है कि जब कम्प्युटर का अविष्कार हुआ तो सब हैरान थे। कम्प्युटर का अविष्कार चार्रल्स बेब्बज ने किया था।इन्हे फादर ओफ कम्प्युटर भी कहाँ जाता है। चार्रल्स बेब्बज एक मेथमेटिशियन, फिलोसफर, इनवेटर ओफ मकेनिकल इंजिनियर थे।इन्होंने एक डिजिटल प्रोगानेबल कम्प्युटर का अविष्कार करा और पुरे विश्व में इतिहास रच दिया। इन्ही की वजह से आज आप और हम लोग कम्प्युटर चला पा रहे है।चार्रल्स बेब्बज का जन्म 26 दिसम्बर सन् 1791 को लंडन,इंगलैंड मे हुआ था। इनके पिता का नाम बेजनामिन बेब्बज था और माँ का नाम बेटसी प्लगलिग थिप था। चार्रल्स बेब्बज के पिता लंडन मे बैंकर थे। वह चार भाई बहन थे। जिनमे से बस चार्रल्स और उनकी बहन मैरी ऐनी ही जिंदा बच पाए।
पहले तो चार्रल्स बेब्बज की शिक्षा उनके घर मे ही होती थी। उन्हे घर में शिक्षक पढ़ाने आते थे। चार्रल्स बेब्बज गणित(Maths)में काफी होशियार थे।वे गणित में ही ढूबे रहते थे।फिर बाद में उनका 30 बच्चो वाली होम्सवुड एकेडमी मे दाखिला करा दिया गया।वहाँ उन्हे गणित की बहुत-सी किताबे मिल जाया करती थी।चार्रल्स बेब्बज को गणित के प्रश्न हल करने मे बड़ा मजा आता था।चार्रल्स बेब्बज ने सन् 1810 में आगे की पढ़ाई के लिए केमब्रिड युनिवर्सटी के ट्रिन्टी काॅलेज में दाखिला ले लिया और चार्रल्स बेब्बज कोन्टेम्प्रेरी मेथामेटिक्स के कुछ भागो को स्वयं ही अध्ययन किया करते थे। वह रोबर्ट वुडहाऊस, जोसपिलोसिस लेगरेंज और मैरी एगनेसी को पढ़ा करते थे। जिसका नतिजा यह हुआ कि युनिवर्सटी मे दी जाने वाली शिक्षा उनके लिए बिल्कुल पर्याप्त नही थी। फिर वे उदास हो गय और फिर बाद में चार्रल्स बेब्बज और उनके दोस्तो ने मिलकर एनालेसिस सोसायटी का गठन किया सन् 1812 में चार्रल्स बेब्बज को पीटरहाऊस केमर्बेज भेज दिया गया था। चार्रल्स बेब्बज वहाँ के सबसे बड़े मेथामेटिशियन थे।सन् 1814 में उन्हे बिना परीक्षा दिए उन्हे उनकी डिग्री भी मिल गयी।चार्रल्स बेब्बज का ग्रेजुऐशन होने के बाद उन्होंने कई नौकरियों के लिए आवेदन किया था। लेकिन आवेदन स्वीकार नही किए गए थे। कई बार चार्रल्स बेब्बज ने काॅलेज के प्रोफेसर के लिए आवेदन किया लेकिन वह आवेदन स्वीकार नही किए गए थे क्योकि उनके पास किसी की भी सिफारिश नही थी। फिर सन् 1815 में चार्रल्स बेब्बज को रोयल इन्स्टट्युड में भाषण देने का मौका मिला। यहाँ पर चार्रल्स बेब्बज ने खगोल विज्ञान पर भाषण दिया था। फिर इसके बाद चार्रल्स बेब्बज ने ज्यार्स्जिना वेटमोर्क्स से शादी की फिर उनके 8 बच्चे हुए। जिनमें से सिर्फ तीन बच्चे ही जिन्दा रह पाए। सन् 1819 चार्रल्स बेब्बज ने अर्षल के साथ पेरिस में सोसाईटी ओफ हर्षल का दोरा किया। जहाँ पर फ्रेन्च मेथामेटीशियन और फिजिशिय्स की मिटींग हो रही थी। उस समय चार्रल्स बेब्बज ने युनिवर्स्टी ओफ इंडवर्ज में प्रोफेसर के लिए आवेदन किया था। पेरिश शिमा रेपलेश की सलाह से लेकिन फिर भी यह पोस्ट विलयम वेलन को दे दिया गया। चार्रल्स को नहीं। फिर सन् 1825 में चार्रल्स ने अर्षल के साथ इलेक्ट्रोडायनमिक ओफ अरागोस रोटेसन पर काम किया। फिर बाद में चार्रल्स और अर्षल ने मिलकर इलेक्ट्रो मेगनेटीक थ्योरी पर काम किया था जो कि अम्बेयर फाॅर्स लाॅ के बहुत ही करीब था। सन् 1820 में चार्रल्स ने रोयल एस्ट्रोनोमिकल सोसाईटी की शुरूआत की इसका उद्देश्य था एस्ट्रोनोमिकल केलकुलेशन को आसान बनाना और सन् 1824 में उन्होंने मेथामेटीकल एस्ट्रोनोमिकल टेबल्स को केलकुलेट करने के लिए एक ईंजन बनाया जिसका नाम उन्होंने डिफेंस ईंजन रखा और इस अविष्कार के लिए उन्हे गोल्ड मेडल मिला। इस अविष्कार के बाद चार्रल्स की उत्सुकता बढ़ती गयी। फिर इससे भी बहतर मशीन बनाने के लिए काम करते रहे। अविष्कार होते ही इसका नाम एनलटीकल ईंजन रखा गया। यह मशीन केलकुलेशन करने मे बहुत काम आई जिससे समय और महनत दोनो कम लगते थे।
यह मशीन बहुत बड़ी थी और इसको बनाने में बहुत खर्चा लगा।इस मशीन को बनाने के लिए चार्रल्स को ब्रिटिश सरकार ने पैसे दिए थे। यह मशीन बहुत बड़ी और भारी थी। इस मशीन का ईंजन भाप से चलता था। इस मशीन को पन्च कार्ड का इस्तेमाल करके प्रोगाम किया गया था। इसी मशीन के कारण आधुनिक कम्प्युटर का निर्माण हुआ था। जिसका कि चार्रल्स बेब्बज की बनाई मशीन के बाद अलग - अलग वेज्ञानिको ने अलग - अलग काम करके कम्प्युटर को अपग्रेड करके और बहतर बनाया।यही कारण है कि आज भी चार्रल्स बेब्बज को फादर ओफ कम्प्युटर भी कहते है। इन्ही के अविष्कार से आज हम डिजिटल दुनिया देख पा रहे है। फिर बाद में 18 ओक्टुबर सन् 1871 में चार्रल्स बेब्बज की मृत्यु हो गई।
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